आज जयलोकमंगल पर मकबूलजी की ग़ज़ल पढ़ी मजा आ गया। और प्रशात योगीजी ने जिस भव्यता के साथ
श्री विश्वमोहन तिवारीजी का स्वागत किया है,वह भी काबिले तारीफ है।भगवानसिंह हंसजी का भरत चरित अत्यंत प्रभावी प्रस्तुति है।डाक्टर मधु चतुर्वेदी,रमाद्विवेदी और प्रेमलता नीलम की गजलें और प्रकाश प्रलय की शब्दिकाए बेहतरीन हैं।ओशो की तो बात ही क्या है। जगदीश्वर चतुर्वेदी का आलेख क्रांति जलेबी नहीं है अत्यंत सारगर्भित आलेख है। सभी को बधाई और योगेश विकास जिस तत्परता से लिख रहे हैं उससे ऐसा लगता है कि अगली बार को टाप फाइव के लिए वे अभी से अपना आरक्षण करा रहे हैं। मेरी शुभकामनाएं..
पंडित सुरेश नीरव------------------------------------------------------------------------------------------------------

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