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Monday, October 25, 2010

रियायरमेंट के बाद का जो खाका आपने खींचा है,वह बहुत दिलचस्प है

प्रतिक्रिया-
Humour is that which most efficiently recognizes that we are living in an imperfect world, with imperfect arguments and things that are insane, illogical, and irrational. And the only way we can live with that fact is to laugh.

हास्य हमें यह बताता है कि हम एक अधूरे संसार में रह रहे हैं,जहां हर चीज के आधे-अधूरे तर्क हैं। जहां हर चीज प्रदूषित है,असंगत है और अनैतिक है। और इन स्थितियों में जीना एक सत्य है और इसी सत्य का नाम हास्य है। 
If someone had told me years ago that sharing a sense of humour was so vital to partnerships, I could have avoided a lot of sex!” मुझे क्या पता था कि हास्य में इतना मजा आता है। अगर जवानी में मालुम पड़ जाता तो मैं सेक्स ही क्यों करता। पंडितजी आपके लेख को पढ़कर बहुत ही मजा आया। रियायरमेंट के बाद का जो खाका आपने खींचा है,वह बहुत दिलचस्प है। और प्रशांत योगीजी ने जो उसकी समीक्षा की है वह भी जानदार और शानदार है। बधाई....
चांडाल

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