
मुनि!उपदेश धर्ममय चोला। बहार ठोसहिं अन्दर पोला। ।
सत्य यह अधर्म का प्रचारा। वर्ण संकर उभरि हि संसारा। ।
राम मुनि से कहते हैं किहे मुनि! आपका उपदेश तो धर्ममय चोला है जो बाहर से ठोस दिकाई देता है और अन्दर से पोला। सत्य है कि यह अधर्म का प्रचार है। इससे संसार में वर्णसंकर पैदा होंगे।
दोहा - विप्रवर! यदि मैं हाँ कर, त्याग दूँ अनुष्ठान ।
अशुभ कर्मों में बिलोक , कौन करे सम्मान । ।
विप्रवर! यदि मैं हाँ कर दूँ और सर्व अनुष्ठानों को त्याग दूँ तो मैं अशुभ कार्यों में हि दिखाई दूंगा और मेरा संसार में कोई सम्मान करेगा क्या।
यदितोडूं कीहुई प्रतिज्ञा । जग में होय मम बहु अवज्ञा। ।
किसका है तुम्हार उपदेशा । तासु अनुसरण करूं हमेशा । ।
मुनि! यदि मैं अपनी प्रतिज्ञा तोड़ दूँ तो संसार में मेरी अवज्ञा हो जायेगी। आपका उपदेश किसका है। मैं उसका सदा अनुशरण करूं।
रचयिता - भगवान सिंह हंस
प्रस्तुतकर्ता -योगेश विकास
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