आदरणीय नीरवजी
दफ्तरी कर्मचारियों के रिटायरमेंट की तकलीफ को आपने बड़ी शिद्दत से पेश किया है। फेयरवैल के समय होनेवाली खुसुर-पुसुर का यह लाइव टेलीकास्ट है। इन पंक्तियों ने तो झखझोर के रख दिया-
शवयात्रा वाहन की नागरिकता ले चुके जिंदा जीव भावुक होने लगे। रिटायरमेंट से बाल-बाल बचा एक साथी हिचकियां ले-लेकर कह रहा था कि भैया संसार का हर प्राणी मरणधर्मा है और हर कर्मचारी रिटायरधर्मा है। जो आया है वह कल जाएगा भी। आज भैयाजी गए हैं कल हम सब भी जाएंगे। समय के कसाई के आगे हम सभी बकरे हैं। कब तक खैर मनाएंगे। और दोस्तो इस तरह तीस साल तक नियमित बेनागा दफ्तरी कष्ट झेलनेवाली एक और बाडी आज मूर्चरी से विदा हो गई...। भैयाजी आज से दफ्तर के लिए एक भूला हुआ अफसाना हो गए,गुज़रा हुआ जमाना हो गए।
एक अच्छे और सार्थक व्यंग्य के लिए बधाई..
अरविंद पथिक
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