Search This Blog

Monday, October 25, 2010


प्रतिक्रिया-
आदरणीय नीरवजी
आपका व्यंग्य आलेख पढ़ाबहुत रोचक लेख है। आपने बड़ी बारीकी से सर्विस क्लास आदमी के मनोविज्ञान का विश्लेषण किया है।प्रशांत योगीजी का आलेख बेहद प्रेरक और ज्ञानवर्धक है। प्रकाश प्रलयजी की शब्दिका भी गुदगुदानेवाली है। आप सभी को बधाई..ही...बधाई
-डाक्टर प्रेमलता नीलम
0000000000000000000000000000000000000000000000000000

No comments: