Search This Blog

Friday, October 22, 2010

शरीर मंदिर है आत्मा का


शरीर भी सत्य है
इस संबंध में विद्वानों के विचार-

वो सभ्यताए मूर्खतापूर्ण हैं जो शरीर के महत्व को नकारती हैं। हमें यह शरीर ईश्वर ने दिया ही क्यों है यदि एक दुर्लभ बेला और चिकारे की तरह इसे अलमारी में बंद करके ही रखना था तो।
How idiotic civilization is! Why be given a body if you have to keep it shut up in a case like a rare, rare fiddle? ~Katherine Mansfield
शरीर को बहुत संभालकर रखो। यही एक जगह है जहां तुम्हारा अस्तित्व रहता है। Take care of your body. It's the only place you have to live. ~Jim Rohn हरेक व्यक्ति अपने शरीर के मंदिर का निर्माता है। खाली संगमरमर पर हथोड़े चलाने से ही मंदिर नहीं बनता है।
Every man is the builder of a Temple called his body, nor can he get off by hammering marble instead. ~Henry David Thoreau
रक्त का नाजुक दरख्त हमारे जिस्म में ही उगता है।
Blood is that fragile scarlet tree we carry within us. ~Osbert Sitwell शरीर को स्वस्थ्य रखना सबसे बड़ा धर्म है। अन्यथा हम पुष्ट और संयत मस्तिष्क से वंचित हो जाएंगे। To keep the body in good health is a duty... otherwise we shall not be able to keep our mind strong and clear. ~Buddha आपका शरीर ही मंदिर है बशर्ते आप ऐसा व्यवहार करें तो..
Your body is a temple, but only if you treat it as one. ~Astrid अलौदा
प्रस्तुतिः ओमप्रकाश


No comments: