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Friday, October 22, 2010

पांडेजी स्वागतम

आज श्री हीरालाल पांडेयजी की पोस्ट पढ़ी। अच्छा लगा। उन्होंने लिखा है कि समय जितनी अनुमति देगा उतना मैं जरूर लिखूंगा। तो पांडेजी समय भी आपका है और ब्लाग भी आपका ही है। अगर आप मन से चाहेंगे तो लिखने का समय भी आपको जरूर मिलेगा क्योंकि कहा गया है कि जहां चाह वहां राह। आप कोशिश करके तो देखें। बहरहाल आपका हार्दिक स्वागत है। और नीरवजी को बधाई जिन्होंने एक अच्छे और सज्जन व्यक्ति को और ब्लाग से जोड़ा।
अरविंद पथिक

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