
आज आदि कवि महर्षि वाल्मीकि की पावन जयंती है। जिनकी लेखनी ने मर्यादा और मूल्यों का एक नया संसार रचा। हम सभी रचनाकारों को इस महान तेजस्वी चेतना को नमन करना चाहिए। और कामना करनी चाहिए की कविता की धारा कभी कंभी कुंद न हो।
-डाक्टर मधु चतुर्वेदी
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