There was an error in this gadget

Search This Blog

Monday, October 31, 2011

गुजरात में पालमपुर रियासत के नाथालाल पारिख फारवर्ड ब्लाक के खजांची थे।पालमपुर में नेताजी से बात करने के लिये गुप्त वायरलेस सेट लगाया गया था।फारवर्ड ब्लाक के नेता शीलभद्र याजी से इस वायरलेस द्वारा नेताजी ने नवंबर १९४३ में बात की ।याजी को सिंगापुर बुलाया गया।उडीसा की चिल्का झील और समुद्र टत के बीच पनडुब्बी पहुंची।साढे सात दिन में याजी ज़ापानी पनडुब्बी से सिंगापुर पहुंचे।वहां उनकी नेताज़ी से ढाई घंटे बात हुई।नेताजी ने विस्तार से भारत की परिस्थितियों की जानकारी ली।याज़ी उसी पनडुब्बी में बैठकर भारत वापस आ गये।बंबई में उन्होने भूमिगत लोगों की बैठक बुलायी।याज़ी ने डा०राममनोहर लोहिया,साने गुरूजी,मुकुंदीलाल आदि के सामने एक विस्तृत योजना प्रस्तुत की ।इस पर लोहिया ने कहा कि मैं सुभाष की मदद नहीं करूंगा।बल्कि उनसे लडूंगा।सुभाष की मदद करने से पावर फारवर्ड ब्लाक के हाथ में चला जायेगा।इस पर शीलभद्र याजी ने कहा कि आज़ादी देश की होगी व्यक्तिगत नहीं। याज़ी लोहिया से लडने को तैयार हो गये।साने गुरूज़ी ने उन्हें पकड लिया।इस पर शीलभद्र याज़ी ने कहा आज से कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी से कोई समबमध नहीं रहेगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का चरित्र और आचरण भी कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी से भिन्न ना था।त्रैलोक्यनाथ चक्रवर्ती ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता केशवराव बलिराम हेडेगेवार से भेंट की और उनसे आग्रह किया कि वे अपने ६०हजार स्वयंसेवकों को क्रांति के इस महासंग्राम में उतारें परंतु हेडेगेवार ने उत्तर दिया ----' इनमें शिशु और अनाडी लोग भी हैं जो क्रांति का सही मतलब नहीं जानते।" कुल मिलाकर वे किसी भी कीमत पर अपने स्वयंसेवकों को क्रांति के लिये उतारने को तैयार नहीं हुए।केवल कीरत पार्टी ने हर तरह का सहयोग देने का वचन दिया।कांगरेस,कम्यूनिस्ट सोशलिस्ट व आर०एस०एस० ने नेताजी को कोई सहयोग नहीं दिया।
Post a Comment