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Friday, May 11, 2012

जयलोकमंगल...

कविवर घनश्याम वसिष्ठ,प्रशांत योगी और भगवानसिंह हंस का आबारी हूं कि वे लोकमंगल में लगातार लिख रहे हैं। प्रकाश प्रलय के परिवार में कोई गमी हो गई है। वे गांव गए हुए हैं. इसलिए लिख नहीं पा रहे। कुछ लोगों ने लिखना बंद कर दिया है. उन्हें टाइम नहीं मिल पा रहा है। कुछ लोग पढ़ते हैं मगर लिख नहीं पाते। सभी के अपने-अपने तर्क हैं।
सभी को जयलोक मंगल।
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