आज लोक मंगल पर अपनी हजामत देख कर लगा की अपुन भी कुछ लोगो के लिए काम के आदमी है । वरना तो ऐसा लगता था कि अपन सिर्फ़ एक वोटर है जिसे केवल मत देने को कहा जाता है पर बहुमत में भुला दिया जाता है। हज्जाम ने आज उतनी ही ख़ूबसूरती से उस्तरा चलाया है जितना खय्याम संगीत में चलाते है। मेरे लिए तो यह सोभाग्य की बात है कि उस्तरे की धार का मुझ पर वार हुआ है । मेरी अनुपस्थिति को नाराजगी से न जोड़ कर सिर्फ़ मजबूरी तक ही सीमित रखा जाना ठीक रहेगा। अपनों से कैसी नारजगी ,वह किसी को क्यों नाराज करगें ।
दरसल आज कल दफ्तर में कंप्यूटर में वायरस ने रस ले लिया कि अपुन से नेट देवता दूर हो गए । घर पर समय निकाल कर आज लिख रहा हूँ।
कुछ तो मजबूरियां रही होंगी , वरना कोई यूँ बेवफा नही होता .....
राजमणि
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