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Thursday, December 17, 2009

हजामत के लिए धन्यवाद

आज लोक मंगल पर अपनी हजामत देख कर लगा की अपुन भी कुछ लोगो के लिए काम के आदमी है । वरना तो ऐसा लगता था कि अपन सिर्फ़ एक वोटर है जिसे केवल मत देने को कहा जाता है पर बहुमत में भुला दिया जाता है। हज्जाम ने आज उतनी ही ख़ूबसूरती से उस्तरा चलाया है जितना खय्याम संगीत में चलाते है। मेरे लिए तो यह सोभाग्य की बात है कि उस्तरे की धार का मुझ पर वार हुआ है । मेरी अनुपस्थिति को नाराजगी से न जोड़ कर सिर्फ़ मजबूरी तक ही सीमित रखा जाना ठीक रहेगा। अपनों से कैसी नारजगी ,वह किसी को क्यों नाराज करगें ।
दरसल आज कल दफ्तर में कंप्यूटर में वायरस ने रस ले लिया कि अपुन से नेट देवता दूर हो गए । घर पर समय निकाल कर आज लिख रहा हूँ।
कुछ तो मजबूरियां रही होंगी , वरना कोई यूँ बेवफा नही होता .....
राजमणि

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