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Monday, December 21, 2009

मधु मिलन की आस में


ब्यूटी पार्लर में
(मधु मिश्रा)

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आज हमारे ब्यूटी पार्लर में तशरीफ लाईं हैं मोहतरमा मधु मिश्रा जो कविताएं लिखती हैं और ये कविताएं कम लिखती हैं मैं इन पर ज्यादा कविताएं लिखता हूं। सब मधु की महिमा है। जब मामला मधु का हो तो ऐसा ही होता है। मधु जिसके जीवन से जुड़ जाए वह जीवन मधुर-मधुर हो जाता है। मास से जुड़ जाए तो मास मधु मास हो जाता है। रात्रि से जुड़ जाए तो रात्रि मधु रात्रि हो जाती है। अच्छी खासी शाला में मधु घुस जाए तो शाला मधुशाला हो जाती है। और बाला पर मधु चढ़ जाए तो मधु मधुबाला हो जाती है। मधु के चक्कर में भंवरा मधुप हो जाता है और यदि मधु के चक्कर में आदमी मधुरा दो जाए तो उसके नाम से मथुरा बस जाता है। कोई मक्खी मधु के चक्कर में आ जाए तो मधु मक्खी हो जाती है। मधुरिम-मधुरिम रात्रि में कौन मधु मधूलिका हो जाए कौन जाने। मधु से मधु का मेह यदि बढ़ जाए तो मधुमेह हो जाता है। और मधुरात्रि में चांद मधु को देख ले तो मधु-चांद हो जाता है जिसे अंग्रेजी में हनीमून कहा जाता है। मधु, भावनाओं से यदि प्रयोगशाला में पहुंच जाए तो वहां मधुकोष मंच बन जाता है। मधु-संचय कहां-कहां करें एक फार्मेसीवाले तो कासमधु सिरप भी बाजार में ला चुके हैं। यानी बाजार में व्यवहार में सब जगह मधु ही मधु है। इसलिए तो ऋग्वेद में कहा गया है, यहां हवाओं में मधु है,सांसों में मधु है,वाणी में मधु है सर्वत्र मधु ही मधु है-मधु वाता ऋतायते.. मेरे भी चारों तरफ मधु ही मधु हैं ऋग्वेद मुझ पर ही तो सार्थक हुआ है, मधुजी । मधु वैसे ही मधुर होता है आप उस पर मिश्री नहीं मिश्रा हैं। मिश्री का भी बाप। आपके क्या कहने। वैसे मिसरा ग़ज़ल में होता है। इस हिसाब से आप ग़ज़ल भी हैं और गीत भी। चुटकुला मैंने बना दिया है आपको ब्यूटीपार्लर में लाकर.. मधु मिलन की आस में
आपका अपना
पं. सुरेश नीरव