क्या बात है अब तो लोकमंगल सचमुच दी जय लोकमंगल होता जा रहा है। एक बहुत बड़ा वर्ग इससे जुड़ता जा रा है क्योंकि शिद्दत से लोगों को एक ऐसे ब्लॉग की तलाश थी जिसमें कि कुछ साहित्यिक सामग्री हो। इस कमी को काफी हज तक यह ब्लॉग पूरी करता है। बढ़िय-बढ़िया गजलें और हजामत जैसे कॉलम और पुस्तक समीक्षा इस ब्लॉग की विशेषता बनती जा रही हैं। यदि सभी साथी इसी तरह अपना रचनात्मक अवदान देते रहें तो रौनक बनी ही रहेगी। पुरुषोत्तमजी की रचना बहुत अच्छी लगी। और हंसजी की हजामत भी। राजमणिजी और मकबूलजी ने बढ़िया गजले पढ़वाई हैं। सभी साथियों को बधाई।
जय लोक मंगल
ओ.चांडाल
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