
तन रंगे मन रंगे भूले बैर-भाव ,
रंग - रंगीले गरियारे , ओसारे और गाँव ,
यूँ तो बसे हुए जहाँ में सातों रंग रंगीले ,
सात सुरों में मिल कर गाएं, फागुन यमुना तीरे,
सात- रंग और सात - सुरों का संगम होली लाई,
भांग घोट कर , पिचकारी भर, बन गए सभी कन्हाई !!
सभी मित्रों को होली की रंगारंग शुभकामनायें ।
अनिल
No comments:
Post a Comment