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Tuesday, February 23, 2010

परवीन शाकिर की कविता

जन्म: 24 नवंबर 1952
निधन: 26 दिसंबर 1994

उपनाम
जन्म स्थानकराची, पाकिस्तान
कुछ प्रमुख
कृतियाँ
खुशबू, सद-बर्ग(१९८०) , ख़ुद-कलामी, इंकार(१९९०), माह-ए-तमाम (१९९४), खुली आंखों में सपना
विविध
जीवनीपरवीन शाकिर / परिचय

प्रस्तुतिः मधु मिश्रा

फूलों और किताबों से आरास्ता घर है

तन की हर आसाइश देने वाला साथी

आंखों को ठंडक पहुंचाने वाला बच्चा

लेकिन उस आसाइश, उस ठंडक के रंगमहल में

जहां कहीं जाती हूं

बुनियादों में बेहद गहरे चुनी हुई

एक आवाज़ बराबर गिरय: करती है

मुझे निकालो !

मुझे निकालो !

परवीन शाकिर


आरास्ता=सुसज्जित, गिरय:=विलाप



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