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Wednesday, February 3, 2010

ज्ञान्न्द्रजी आप तो लोकमंगलकारी हैं ही

ज्ञानेन्द्रजी लोकमंगल के सदस्य अभी से नहीं काफी दिनों से हैं मुझे तो ऐसा ही लगता है क्योंकि न जाने कितने आयोजनों में उनके साथ रहने का मौका मिला है उनके कार्यालय और घर में गोष्ठियां अटेंड की हैं। ज्ञानेन्द्रजी बहुत ही सामाजिक व्यक्ति हैं मैं पालागन सिर्फ पं. सुरेश नीरव और ज्ञान्न्द्रजी को ही करता हूं और इसका मतलब भी इन्हीं से समझा हूं। बधाई हो॥
भगवान सिंह हंस

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