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Friday, February 5, 2010

मानव-मानवता की जय हो

नीरव जी आप चतुर सुजान हो। खानदानी पहलवान हो। इटली घूम के आए अपने ढेर सारे चित्र दिखाए। इससे क्या होता है भाई अपने मित्रों के लिए क्या लाए? क्या आपने सोनिया जी का घर देखा। राहुल का ननिहाल से कुछ उपहार पाया? क्या आपने रोम-रोम से बात की? इतनी बाते मैं इस िलए भूमिका के साथ कह रहा हूं कि आप अब मेरी नए वष$ ती शुभकामना स्वीकार करें, क्योंकि मैं उस दौरान स्वस्थ नहीं था।
नया-नया उत्साह दिखे और नई-नई हिरयाली हो
नए-नए सुमनों की खेती और भाग्य बलशाली हो
नई सभ्यता नई उमंगें, नया-नया दमखम लौटे
नव गति-नव लय नए साल में सूरज शीतलता औंटे
नई-नई प्रतिभाएं चमके, दूर गगन की छांव में
नए पथिक हों, नया पंथ हो, नई कुमक विश्राम में
नई कहानी गढ़ें परस्पर, आस और विश्वास की
नई जवानी दूर करे सब कुरीितयां जो पास की
नई चेतना, नई कामना, नया-नया उत्साह जगे
नव प्रसून प्रगल्भ सदा हों, नव प्रकाश से तिमर भगे
मानवता के नए पाठ हम नए वष$ में समझाएं
मानव-मानवता की जय हो, आआे सब िमल कर गाएं।
अशोक मनोरम

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