जय हो पंडितजी की। इटली से टल्ली होकर लौटे हैं। रेडवाइन का अंगूरी शबाब रोम-रोम से छलक रहा है। वेनिस आंखों से झलक रहा है। क्या बात है हुजूर की। मैं तो यही कहूंगा कि इटली सो आया मेरा दोस्त दोस्त को सलाम करो। भैया मैं भी होनोलुलू से वापस लौटा हूं। काफी लंबा प्रवास रहा। इसलिए जय लोक मंगल से गायब रहा। लो फिर से आ गया हूं मैं। आज एक लतीफा दे रहा हूं-
सात साधू चटाइयां बिछाए सड़क किनारे बैठे थे। एक नवयुवक ने एक साधु से कहा, बड़ी परेशानी मैं हूं। लड़कियां लाइन नहीं मारतीं,क्या करूं।
साधु ज़ोर से बोला, एक चटाई और डालना भैया।
ओ.चांडाल
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