ज़ालिम था वो और ज़ुल्म की आदत भी बहुत थी
मजबूर थे हम उससे मुहब्बत भी बहुत थी
उस बुत के सितम सह के दिखा ही दिए हमने
गो अपनी तबियत में बगावत भी बहुत थी
वाकिफ ही न था रम्ज़ -ए-मुहब्बत से वो वर्ना
दिल के लिए थोड़ी -सी इनायत भी बहुत थी
यूँ ही नहीं मशहूर-ए -ज़माना मेरा कातिल
उस शख्स को इस फन में महारत भी बहुत थी
प्रस्तुति: अनिल (०९.०२.२०१० अप १२.०५ बजे )
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