अथ आरम्भ जय नाम नियंता,
निश्चल भरत चरित अनंता॥
अतुलित जीवन नयन अभिरामा,
जय श्री भरत, जय श्री रामा॥
ये श्रद्धा सुमन समर्पित हैं भरत चरित्र - महा काव्य के रचयिता श्री भगवान सिंह हंस जी के निश्चल चरण कमलों में जिन्होंने अपने इस मनुष्य जीवन के अवतरण को साकार कर दिखाया है। मुझे उनका पुत्र होने पर गर्व है।
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