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Thursday, October 21, 2010

माया बिना सब व्यर्थ है


माया
भक्तों के माया-दान से

वेंकटेश भी परेशान हैं

आठों पहर रहते खड़े
अभिनय उनका महान है
00

सरकार की नजरों से हरदम

कर छुपा लेते होतुम

किंतु अपने पाप धोने को
मुझ पर चढ़ा दोते हो तुम।

00

माया की अनुमति के बिना

आशीष मेरा पा सको ना

इहलोक की तो बात क्या

परलोक भी तुम जा सको ना।
00
माया से ही वैभव मेरा
माया स्वचालित स्वर्ग है

माया बिना बस नर्क है

बिना सब व्यर्थ है।
00

डाक्टर रमा द्विवेदी (हैदराबाद)
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