
माया
भक्तों के माया-दान से
वेंकटेश भी परेशान हैं
आठों पहर रहते खड़े
अभिनय उनका महान है
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सरकार की नजरों से हरदम
कर छुपा लेते होतुम
किंतु अपने पाप धोने को
मुझ पर चढ़ा दोते हो तुम।
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माया की अनुमति के बिना
आशीष मेरा पा सको ना
इहलोक की तो बात क्या
परलोक भी तुम जा सको ना।
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माया से ही वैभव मेरा
माया स्वचालित स्वर्ग है
माया बिना बस नर्क है
बिना सब व्यर्थ है।
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डाक्टर रमा द्विवेदी (हैदराबाद)
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