कुछ दोहे-
ये तो सच तट पर कभी नहीं डूबती
नाव पर नावें किस अर्थ जो बहें न बीच बहाव
आ जाता है हौंसला विजयी नर के पास
मगर हौसले के बिना हो न विजय की आस
नफरत संकरा दायरा सीमित हो संसार
प्रेम दिलाए मनुज को सार्वभौम
कितना आप संभलकर रखते कच्चा कांच
उससे नाजुक चीज दिल उसको देते आंच
ये न जरूरी है करो कोई काम महान
छोटी-छोची नेकियां करने की लो ठान।
डाक्टर मधु चतुर्वेदी
0000000000000000000000000000000000000000000000000
No comments:
Post a Comment