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Monday, December 13, 2010

बँधुआ मजदूर


लुभावने बिम्ब और चित्र

हमारे आमंत्रण पर आते हैं

हमारे मेहमान होते हैं

हमारे ही घर में

घर के भेदी की सहायता से

करते हैं आक्रमण

हमारे ही मन पर


छा जाते हैं हर बार

हमारे दिलो दिमाग पर

हमें पता ही नहीं लगता

लगवाकर अँगूठा हमसे

गिरवी रख लेते हैं

हमारा घरबार

पर्दा डालते हैं हम खिड़कियों पर

कहीं धुँधला न कर दे प्रकाश

सतरंगी पर्दों पर नाचते

बिम्बों और चित्रों को

बन जाते हैं खुशी खुशी

बँधुआ मजदूर हम

नाचते

बिम्बों और चित्रों के


.... . . .. . . . . . . .. .. . .

विश्व मोहन तिवारी . एयर वाइस मार्शल . से नि .

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