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Friday, December 31, 2010

नव वर्ष मंगलमय हो


बृहद भरत चरित्र महाकाव्य के कुछ अंश आपके लिए ---
अथारम्भ जय नाम नियंता। निश्चल भरत चरित्र अनंता। ।
अतुलित जीवन नयनअभिरामा। जयजय भरतहिजय श्रीरामा। ।
भरत ह्रदय राम सम भागी। सुविग्य कुशल धर्म अनुरागी । ।
सूर्य चन्द्र सम मेल मिलावें। स्रष्टि सुने चरित जेहि गावें। ।
मंगल मूर्ति अमंगलहारी। जय जय भरत जटा सिर धारी । ।
साधु संत बहु सेवाकारी। नन्दीग्राम शोभित अति भारी । ।
दोहा -
भरत भाव जिस तन , पूरण हों सब कार्य।
सफल मनोरथ भरत का, आनंदित सब आर्य । ।
-भगवान सिंह हंस
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