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Sunday, January 9, 2011

मानव: भाई जी प्रणाम


मानव: भाई जी प्रणाम ! आज तक मैंने बड़े-बड़े लोगों का साक्षात्कार किया ! परन्तु आपके साक्षात्कार में 80 रूपये खर्च हो गए. कल तक कोई आप पर ध्यान नहीं देता था और आज आप इतने महंगे कैसे हो गए ?
प्याज: भई छोटी सी बात तुम्हारी समझ में नहीं आती – डिमांड एंड सप्लाई. आप लोगों से कहा गया है कि भर पेट खाओ होश में रहो. होश में रहने का तात्पर्य है कि हमारी सत्ता कुछ भी करे लोग चुप रहें. हमने भ्रष्टाचार पर बोला तो बंद हो गया निवाला. फिर भी नहीं समझे.
मानव: आप तो बुद्धिजीवियों की तरह बोलने लगे हैं. थोड़ा अपनी वाणी को स्पष्ट कीजिये.
प्याज: वर्षों से मेरा क्रय-विक्रय हो रहा है, कभी कोई दिक्कत हुई ! नहीं न. लेकिन आप लोग बीच-बीच में आजाद मानव बनने लगते हैं तो ये संवेदनहीन सत्ताधारी मुझे बोरों में बांधकर सड़ा देते हैं गला देते हैं लेकिन आप तक नहीं पहुँचने देते.
मानव: ये ऐसा क्यों करते हैं ?
प्याज: क्योंकि वो जब कभी परेशान हो जाते हैं तो मेरा इस्तेमाल करते हैं.
मानव: वो कैसे ?
प्याज: क्योंकि वो जानते हैं कि आप लोगों के जीवन में मेरा महत्व क्या है. आपको प्याज न मिले तो बार-बार आप प्याज प्याज करने लगते हैं. और सारी बातें भूल जाते हैं.
मानव: वो ऐसा क्यों करते हैं ?
प्याज: वो ऐसा इसलिए करते हैं जब उन्हें सत्ता से दिक्कत होती है और मैं जब चाहूँ किसी की भी सरकार गिरा सकता हूँ. आपको याद होगा जब देशभक्त अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी तब भी इसी प्रकार की स्थिति पैदा हुई थी और में उनकी निष्ठा पर भारी पड़ा था. वही स्थिति आज भी होने वाली है. मैं उद्योगपतियों का पैदल बनकर रह गया हूँ ! जैसे देश का प्रत्येक मानव ! वो जब चाहें, जिसे चाहें परेशान ही नहीं उसका अस्तित्व मिटा सकते हैं.
मानव: लेकिन प्याज जी, आप तो ऐसी बात बता रहे हैं जिसे जानकर जनता प्रत्येक दल का अस्तित्व मिटाकर खुद नेतृत्व करने लगेगी. आपकी बात में कितनी सच्चाई है ?
प्याज: मैं शत् प्रतिशत सच बोल रहा हूँ मानव भाई ! मैं प्याज हूँ सो ऐसा बोल सकता हूँ. तुम मानव हो इसलिए बोल भी नहीं सकते. क्योंकि तुमने थोड़ा सा उद्योगपतियों के बारे में बोला तो उन्होनें मेरा दाम बढ़ाकर तुम अरबों की संख्या में हो फिर भी तुम्हें मेरा साक्षात्कार करने पर विवश कर दिया. यदि तुमने और बोला तो वो तुम्हें भगत सिंह जैसी मौत देंगे और तुम इतिहास के पन्नों पर अंकित भी नहीं हो पाओगे. तुम लोकतंत्र की बात करते हो और लोकतंत्र भी सिर्फ उनका एक प्यादा भर है. जैसे मैं हूँ. वो जो चाहते हैं वही होता आया है इस देश में, और भविष्य में भी वही होगा जो वो चाहेंगे ! क्योंकि उनका ईश्वर रुपया है और हमारा इश्वर पता नहीं कौन है ?
मानव: आप ऐसी बात कैसे कह सकते हैं ! उद्योगपतियों की वजह से ही तो देश आर्थिक तरक्की के पथ पर अग्रसर हुआ है. वो आपका इस्तेमाल करते हैं इसलिए आप उनके बारे में ऐसा बोल रहे हैं. नहीं तो टमाटर या आपके परिवार के किसी अन्य सदस्य ने तो कुछ भी नहीं बोला ?
प्याज: तुम बड़े भोले हो मानव ! मेरा प्रयोग बार-बार किया जाता है उद्योगपतियों द्वारा. इसलिए मेरे परिवार में मेरा भी विरोध शुरू हो गया है. टमाटर, आलू, धनिया और हरे मिर्च ने भी आजकल उद्योगपतियों से सीधा संवाद स्थापित करना आरम्भ कर दिया है. मैं थोड़ा नामचीन हो गया हूँ इसलिए उनमें जलन पैदा हो गयी है. और जहाँ तक देश की आर्थिक प्रगति की बात है तो उसका श्रेय सिर्फ उद्योगपतियों को देना उचित नहीं है क्योंकि पूँजी के अलावा प्रत्येक चीज पर वो देश और देश की जनता की मदद लेते रहे हैं और भविष्य में भी लेते रहेंगे.
मानव: आप अपने परिवार के सदस्यों जैसे टमाटर, बैंगन, मिर्चा, लहसुन इत्यादि को समझाते नहीं हैं ?
प्याज: आज के समय में कोई किसी को कैसे समझाए. सबसे कठिन कार्य है पूर्वाग्रह के शिकारों का मार्गदर्शन. उन्हें ऐसा लगता है कि मैं भविष्य में सब्जी संघ का अध्यक्ष बन जाऊँगा. वो सब मूर्ख हैं क्योंकि वो धरती के ऊपर रहते हैं जबकि मैं तब तक धरती के नीचे रहता हूँ जब तक कोई खोद कर न निकाले !
मानव: अच्छा एक बात और बताईये कि ये सब करते क्या हैं आपका मूल्य बढ़ाने के लिए ?
मानव: धीरे धीरे सुनो, ये राज मैं कभी किसी को नहीं बताता क्योंकि जो कोई भी इसे जगजाहिर करेगा उसका देश निकाला कर दिया जाएगा. वो लोग अपने छोटे एजेंट पाले हुए हैं जो मेरे उत्पादनकर्ता से मुझे खरीद लेते हैं. ये छोटे-छोटे एजेंट एक बड़े एजेंट तक हमें देश के विभिन्न हिस्सों से एकत्र कर गोदाम में भर देते हैं और भिन्न भिन्न शहरों, कस्बों और देशों में बोरे में बांधकर भेज देते हैं. तो, जो ये बड़े एजेंट होते हैं वो इनके गुलाम हैं. बड़े सेठ इन छोटे सेठों को हमारा मूल्य चुका देते हैं और ये हमें गोदाम में ही सड़ा देते हैं या फिर नदियों में बहा देते हैं.
मानव: आपके साथ इतना अत्याचार होता है तो राजनीति और राजनेता अपनी आवाज आपके लिए बुलंद नहीं करते ?
प्याज: अरे मानव, तुम भी बड़े अजीब हो. तुमने तो ऐसा प्रश्न कर दिया कि मैं इसका उत्तर नहीं दे सकता क्योंकि यदि मैंने उत्तर दिया तो हमारे देश को अशांति घेर लेगी. बस करो.
मानव: नहीं प्याज भाई, बताइए प्लीज. आप छुपाएंगे तो आपका साक्षात्कार भारत बोलेगा डॉट कॉम पर नहीं छपने दूंगा.
प्याज: बताता हूँ ! बताता हूँ ! अब तुमने जिद्द कर ही लिया है तो सुनो. यह देश शुरू से ही साधु संतों का देश रहा है. यहाँ धर्मनीति को राजनीति समझा जाता रहा है. जब कोई साधु सत्य के मार्ग पर चलता है तो ये व्यापारी उसे साधन दान के रूप में देना शुरू करते हैं. आगे जब उस साधु की साख पर सत्ता कायम होती है तब ये व्यापारी दुरात्माओं को महत्वपूर्ण पदों पर बैठाकर दान किये गए धन का लगभग एक करोड़ गुना ज्यादा धन वापस ले लेते हैं, क्योंकि ये साधन की राजनीति करते हैं. जो इन पर कार्रवाई करने जाता है उसे साधनहीन बना देते हैं. आज इन्होनें भूख के भय का तापमान इतना ज्यादा कर दिया है कि लोगों के हृदय से संवेदनशीलता ही मिटती जा रही है. जब सबकी सोच सिर्फ रोटी, कपड़ा, मकान और सेक्स प्राप्त करने की हो जायेगी तब ये राजनीति को भी पूर्णतया उद्योग जैसा घोषित कर देंगे और देश की प्रत्येक राजनीतिक पार्टी प्राईवेट लिमिटेड के सिद्धांतों पर कार्य करेगी. तब रोटी सिर्फ उसी को मिलेगी जो इनका गुलाम होगा. भारत माता अपने बच्चों को दूध भी इनकी मर्जी से पिलाएगी.
मानव: क्या बोल रहें हैं ? पागल हो गए हैं क्या ?
प्याज: सच कहता हूँ मानव. ये बड़े ताकतवर हैं. ये भारतीय और अंग्रेज नहीं हैं. इनका कोई देश अपना सगा नहीं है. इनका ईश्वर है रुपया और ये पूरी दुनिया को बाजार भर समझते हैं. ये एक अदृश्य शासन करते हैं. ये मुठ्ठी भर हैं और इनका किला इतना मजबूत है जिसे कोई नष्ट नहीं कर सकता. तुम चाहो तो ये सब भारत बोलेगा डॉट कॉम पर लिख दो. कुछ नहीं होगा, क्योंकि ये लोगों के ह्रदय को निष्ठुर बनाते जा रहे हैं जिससे इस देश में मनुष्यता न होगी ! होगा तो सिर्फ एक नियम ! जिसकी पूंजी उसकी भैंस ! अगर तुम मानव हो तो समस्त मानवजाति को एक कर भारत माता और उसकी सम्पदा को बचा लो और अगर तुम भी इन्हीं की तरह हो तो जाओ ऐश करो. मुझे सड़ने जाना है. आज मेरे सड़ने का दिन है.मानव: भाई जी प्रणाम ! आज तक मैंने बड़े-बड़े लोगों का साक्षात्कार किया ! परन्तु आपके साक्षात्कार में 80 रूपये खर्च हो गए. कल तक कोई आप पर ध्यान नहीं देता था और आज आप इतने महंगे कैसे हो गए ?
प्याज: भई छोटी सी बात तुम्हारी समझ में नहीं आती – डिमांड एंड सप्लाई. आप लोगों से कहा गया है कि भर पेट खाओ होश में रहो. होश में रहने का तात्पर्य है कि हमारी सत्ता कुछ भी करे लोग चुप रहें. हमने भ्रष्टाचार पर बोला तो बंद हो गया निवाला. फिर भी नहीं समझे.
मानव: आप तो बुद्धिजीवियों की तरह बोलने लगे हैं. थोड़ा अपनी वाणी को स्पष्ट कीजिये.
प्याज: वर्षों से मेरा क्रय-विक्रय हो रहा है, कभी कोई दिक्कत हुई ! नहीं न. लेकिन आप लोग बीच-बीच में आजाद मानव बनने लगते हैं तो ये संवेदनहीन सत्ताधारी मुझे बोरों में बांधकर सड़ा देते हैं गला देते हैं लेकिन आप तक नहीं पहुँचने देते.
मानव: ये ऐसा क्यों करते हैं ?
प्याज: क्योंकि वो जब कभी परेशान हो जाते हैं तो मेरा इस्तेमाल करते हैं.
मानव: वो कैसे ?
प्याज: क्योंकि वो जानते हैं कि आप लोगों के जीवन में मेरा महत्व क्या है. आपको प्याज न मिले तो बार-बार आप प्याज प्याज करने लगते हैं. और सारी बातें भूल जाते हैं.
मानव: वो ऐसा क्यों करते हैं ?
प्याज: वो ऐसा इसलिए करते हैं जब उन्हें सत्ता से दिक्कत होती है और मैं जब चाहूँ किसी की भी सरकार गिरा सकता हूँ. आपको याद होगा जब देशभक्त अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी तब भी इसी प्रकार की स्थिति पैदा हुई थी और में उनकी निष्ठा पर भारी पड़ा था. वही स्थिति आज भी होने वाली है. मैं उद्योगपतियों का पैदल बनकर रह गया हूँ ! जैसे देश का प्रत्येक मानव ! वो जब चाहें, जिसे चाहें परेशान ही नहीं उसका अस्तित्व मिटा सकते हैं.
मानव: लेकिन प्याज जी, आप तो ऐसी बात बता रहे हैं जिसे जानकर जनता प्रत्येक दल का अस्तित्व मिटाकर खुद नेतृत्व करने लगेगी. आपकी बात में कितनी सच्चाई है ?
प्याज: मैं शत् प्रतिशत सच बोल रहा हूँ मानव भाई ! मैं प्याज हूँ सो ऐसा बोल सकता हूँ. तुम मानव हो इसलिए बोल भी नहीं सकते. क्योंकि तुमने थोड़ा सा उद्योगपतियों के बारे में बोला तो उन्होनें मेरा दाम बढ़ाकर तुम अरबों की संख्या में हो फिर भी तुम्हें मेरा साक्षात्कार करने पर विवश कर दिया. यदि तुमने और बोला तो वो तुम्हें भगत सिंह जैसी मौत देंगे और तुम इतिहास के पन्नों पर अंकित भी नहीं हो पाओगे. तुम लोकतंत्र की बात करते हो और लोकतंत्र भी सिर्फ उनका एक प्यादा भर है. जैसे मैं हूँ. वो जो चाहते हैं वही होता आया है इस देश में, और भविष्य में भी वही होगा जो वो चाहेंगे ! क्योंकि उनका ईश्वर रुपया है और हमारा इश्वर पता नहीं कौन है ?
मानव: आप ऐसी बात कैसे कह सकते हैं ! उद्योगपतियों की वजह से ही तो देश आर्थिक तरक्की के पथ पर अग्रसर हुआ है. वो आपका इस्तेमाल करते हैं इसलिए आप उनके बारे में ऐसा बोल रहे हैं. नहीं तो टमाटर या आपके परिवार के किसी अन्य सदस्य ने तो कुछ भी नहीं बोला ?
प्याज: तुम बड़े भोले हो मानव ! मेरा प्रयोग बार-बार किया जाता है उद्योगपतियों द्वारा. इसलिए मेरे परिवार में मेरा भी विरोध शुरू हो गया है. टमाटर, आलू, धनिया और हरे मिर्च ने भी आजकल उद्योगपतियों से सीधा संवाद स्थापित करना आरम्भ कर दिया है. मैं थोड़ा नामचीन हो गया हूँ इसलिए उनमें जलन पैदा हो गयी है. और जहाँ तक देश की आर्थिक प्रगति की बात है तो उसका श्रेय सिर्फ उद्योगपतियों को देना उचित नहीं है क्योंकि पूँजी के अलावा प्रत्येक चीज पर वो देश और देश की जनता की मदद लेते रहे हैं और भविष्य में भी लेते रहेंगे.
मानव: आप अपने परिवार के सदस्यों जैसे टमाटर, बैंगन, मिर्चा, लहसुन इत्यादि को समझाते नहीं हैं ?
प्याज: आज के समय में कोई किसी को कैसे समझाए. सबसे कठिन कार्य है पूर्वाग्रह के शिकारों का मार्गदर्शन. उन्हें ऐसा लगता है कि मैं भविष्य में सब्जी संघ का अध्यक्ष बन जाऊँगा. वो सब मूर्ख हैं क्योंकि वो धरती के ऊपर रहते हैं जबकि मैं तब तक धरती के नीचे रहता हूँ जब तक कोई खोद कर न निकाले !
मानव: अच्छा एक बात और बताईये कि ये सब करते क्या हैं आपका मूल्य बढ़ाने के लिए ?
मानव: धीरे धीरे सुनो, ये राज मैं कभी किसी को नहीं बताता क्योंकि जो कोई भी इसे जगजाहिर करेगा उसका देश निकाला कर दिया जाएगा. वो लोग अपने छोटे एजेंट पाले हुए हैं जो मेरे उत्पादनकर्ता से मुझे खरीद लेते हैं. ये छोटे-छोटे एजेंट एक बड़े एजेंट तक हमें देश के विभिन्न हिस्सों से एकत्र कर गोदाम में भर देते हैं और भिन्न भिन्न शहरों, कस्बों और देशों में बोरे में बांधकर भेज देते हैं. तो, जो ये बड़े एजेंट होते हैं वो इनके गुलाम हैं. बड़े सेठ इन छोटे सेठों को हमारा मूल्य चुका देते हैं और ये हमें गोदाम में ही सड़ा देते हैं या फिर नदियों में बहा देते हैं.
मानव: आपके साथ इतना अत्याचार होता है तो राजनीति और राजनेता अपनी आवाज आपके लिए बुलंद नहीं करते ?
प्याज: अरे मानव, तुम भी बड़े अजीब हो. तुमने तो ऐसा प्रश्न कर दिया कि मैं इसका उत्तर नहीं दे सकता क्योंकि यदि मैंने उत्तर दिया तो हमारे देश को अशांति घेर लेगी. बस करो.
मानव: नहीं प्याज भाई, बताइए प्लीज. आप छुपाएंगे तो आपका साक्षात्कार भारत बोलेगा डॉट कॉम पर नहीं छपने दूंगा.
प्याज: बताता हूँ ! बताता हूँ ! अब तुमने जिद्द कर ही लिया है तो सुनो. यह देश शुरू से ही साधु संतों का देश रहा है. यहाँ धर्मनीति को राजनीति समझा जाता रहा है. जब कोई साधु सत्य के मार्ग पर चलता है तो ये व्यापारी उसे साधन दान के रूप में देना शुरू करते हैं. आगे जब उस साधु की साख पर सत्ता कायम होती है तब ये व्यापारी दुरात्माओं को महत्वपूर्ण पदों पर बैठाकर दान किये गए धन का लगभग एक करोड़ गुना ज्यादा धन वापस ले लेते हैं, क्योंकि ये साधन की राजनीति करते हैं. जो इन पर कार्रवाई करने जाता है उसे साधनहीन बना देते हैं. आज इन्होनें भूख के भय का तापमान इतना ज्यादा कर दिया है कि लोगों के हृदय से संवेदनशीलता ही मिटती जा रही है. जब सबकी सोच सिर्फ रोटी, कपड़ा, मकान और सेक्स प्राप्त करने की हो जायेगी तब ये राजनीति को भी पूर्णतया उद्योग जैसा घोषित कर देंगे और देश की प्रत्येक राजनीतिक पार्टी प्राईवेट लिमिटेड के सिद्धांतों पर कार्य करेगी. तब रोटी सिर्फ उसी को मिलेगी जो इनका गुलाम होगा. भारत माता अपने बच्चों को दूध भी इनकी मर्जी से पिलाएगी.
मानव: क्या बोल रहें हैं ? पागल हो गए हैं क्या ?
प्याज: सच कहता हूँ मानव. ये बड़े ताकतवर हैं. ये भारतीय और अंग्रेज नहीं हैं. इनका कोई देश अपना सगा नहीं है. इनका ईश्वर है रुपया और ये पूरी दुनिया को बाजार भर समझते हैं. ये एक अदृश्य शासन करते हैं. ये मुठ्ठी भर हैं और इनका किला इतना मजबूत है जिसे कोई नष्ट नहीं कर सकता. तुम चाहो तो ये सब भारत बोलेगा डॉट कॉम पर लिख दो. कुछ नहीं होगा, क्योंकि ये लोगों के ह्रदय को निष्ठुर बनाते जा रहे हैं जिससे इस देश में मनुष्यता न होगी ! होगा तो सिर्फ एक नियम ! जिसकी पूंजी उसकी भैंस ! अगर तुम मानव हो तो समस्त मानवजाति को एक कर भारत माता और उसकी सम्पदा को बचा लो और अगर तुम भी इन्हीं की तरह हो तो जाओ ऐश करो. मुझे सड़ने जाना है. आज मेरे सड़ने का दिन है.
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