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Friday, January 28, 2011


अपेक्षा

आज दिल चाहता है
कि बच्चे की तरह किलकारी भरूं
घुटनों के बल चलूं
तुतला कर बोलूं
गुब्बारा उडाऊं
और उड़ जाऊँ
गुब्बारों के संग

आज दिल चाहता है
उड़ जाऊं पंछी बन
छू लूं आकाश
चूम लूं पलाश
कर लूं तलाश
अपनी मंजिल
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