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Friday, February 4, 2011



अपने आप

अपने ही दिल को तसल्ली देने को
अपनी ही आँखों से आँसूं छलका कर रो दिए

कोई कान्धा न मिला सिर रखने को
अपने ही तकिये पर सिर टिका कर रो दिए

न सहलाया उस पर भी जब किसी ने ग़मगीन माथा
अपनी ही उंगली बालों में फिरा कर सो गए ....


मंजु ऋषि (मन)

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