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Friday, February 4, 2011

किसिम-किसिम की सड़कें


हास्य-व्यंग्य-

पंडित सुरेश नीरव
हिंदी के समर्थ एवं लोकप्रिय कवि एवं व्यंग्यकार पंडित सुरेश नीरव पिछले तीन दशकों से लेखन में सक्रिय हैं और इनकी अभी तक सोलह पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। छब्बीस से अधिक देशों की यात्रा कर चुके श्री नीरव की रचनाओं का अंग्रेजी,फ्रेंच,ताइवानी और उर्दू में अनुवाद हो चुका है। भारत के  तीन राष्ट्रपतियों से सम्मानित इस रचनाकार के सात टीवी सीरियल भी प्रसारित हो चुके हैं।
भारत कभी कृषिप्रधान देश था,आज सड़क प्रधान देश बन चुका है।क्योंकि यहां आदमी सड़क को अपने व्यक्तित्व में इतना उतार लेता है कि बड़ी शान से वह सड़क छाप बन जाता है। और सड़क नापते-नापते न से संसद तक पहुंच जाता है। और साहब कुर्सी से उतरते ही फिर सड़क पर आ जाता है। और जो होनहार बिरवान सड़क को ही अपना इष्ट मानलेता है वह आगे चलकर सड़क-परिवहन मंत्री तक बन जाता है। सड़क भी शहर में किसिम-किसिम की होती हैं। मसलन-ठंडी सड़क,गर्म सड़क,नई सड़क,पुरानी सड़क,छहफुटा सड़क। सड़क अनंत सड़क कथा अनंता। वैसे हमारे देश की, देश के लोकमानस की,लोकतंत्र की और लोकसंस्कृति की आपको झलक देखनी हो तो सड़क का मुआयना भर कर लीजिए। धरना,प्रद्रशन,शादी-बारात, धार्मिक जलूस और युवा प्रमियों के प्रणय की क्रीड़ा स्थली यह सड़क ही होती है। और अगर सड़क महिलाकालेज या गर्ल्स होस्टल के सामने की सड़क हो तो इसका सांस्कृतिक महत्व कुछ  और ज्यादा बढ़ जाता है। सड़क हमारे देश में बहुआयामी गतिविधियों की विविध भारती स्थली होती है। अब तो बड़े-बड़े नेता भी सड़क का महत्व समझ के रोड शो करने लगे हैं। महानगरों में तो रोज़-रोज़ रोडरेज़िंग के कार्यक्रम उत्साहपूर्वक आयोजित होने लगे हैं। और सड़क-संग्राम में आए दिन कुछ सड़क-बांकुरे शहीद भी हो जाते हैं। और सड़क के आन-बान-शान और सम्मान में चार चांद लगा देते हैं। कुछ श्रंगार प्रेमी नेताओं को तो सड़क बेमामालिनी के गालों की तरह चिकने नज़र आते हैं। सड़क के इसी दर्शन ने लालूजी को आज सड़क पर ला दिया।


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