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Thursday, March 17, 2011

ये सांझ मेरी असनाई में

ये सांझ मेरी असनाई में कुछ यादें और सजा दे तू....
वो दूर रहे चाहे जितना, मिलने की आस बंधा दे तू.....
दुख देख मेरे जग हंसता है.....
मेरे भी होंठ मचलते है.....
अंतर दोनों के हिलने में....
मुझको भी हंसना सिखला दे तू....
ये सांझ मेरी असनाई में कुछ यादें और सजा दे तू....
वो दूर रहे चाहे जितना, मिलने की आस बंधा दे तू....

मनोज कुमार दीक्षित,प्रोड्यूसर, सहारा समय
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