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Wednesday, March 16, 2011

रंगों का त्यौहार होली

आदरणीय नीरवजी चरण वन्दना स्वीकार करें। जय लोकमंगल पर होली देखकर मजा आ गया। कितने सारे लोगों ने इस होली महोत्सव में भाग लिया मेरे उन्हें भी नमन।
1 श्रीमति मधु मिश्रजी रंग घोल रही हैं और नीरवजी भर-भर पिचकारी रंग की फुहारों से सराबोर कर रहे हैं।
२ मंजु ऋषि भी रंगों के प्रेम भरे बारों से पीछे नहीं हैं।
३ प्रशांत योगी पिचकारी लेकर दौड़ रहे हैं।
३ डा० मधु चतुर्वेदी खूब रगों की लुफ्त लूट रही हैं।
४ विश्वमोहन तिवारीजी भी रंगों की मस्ती में मस्त हैं।
५ डा० प्रेम लता नीलम भी दमोह से होली खेलने आई हैं।
६ प्रकाश प्रलय कटनी से ब्रजमंडल में होली खेलने आये हैं।
७ प्रेम लता पाण्डेय , अरविन्द योगी और पूनम दहिया इस रंगों के पर्व में नीरवजी के साथ अपनी बेहतरीन होली की कवितायों के रंग में रंगकर खूब मजा ले रही हैं।
८ पथिक, राजू, मकबूल और जगदीश परमार भी होली का खूब आनंद ले रहे हैं।
९ बी एल गौड़ और भगवान सिंह हंस भी इस पर्व से आनंदविभोर हैं।
१० ओ चांडाल होली के रंग में रंगकर आनंदित हैं।
११ मुकेश परमार भी खूब रंग वर्षा रहे हैं ।
१२ और अली हसन मर्केंदिया भी रंगों में सराबोर होकर मजा ले रहे हैं।
यह रंगों का त्यौहार जाति और धर्म से ऊपर उठकर है। यह एक दोस्ती -भाईचारे का त्यौहार है।
इसमें कोई रंग या धर्म भेद नहीं है। और उंच-नीच से दूर है। कहने का अर्थ है कि यह त्यौहार अपने विभिन्न रंगों के रंगों में रंगकर समानता और एकता का सूत्र पिरोता है। यह सात्विक प्रेम हैजो मनुष्यता अपरिहार्य है।
योगेश विकास




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