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Thursday, June 16, 2011

जब तुम जाओ,

जब तुम जाओ, मुझे जगा देना।
में मदमाती,राह तुम्हारी अनजाने आई थी
देखा तुम्हें, क़दम थिरके, में लहराती आई थी।
तुमने मुझको थाम लिया था,प्यार किया था।
बाद प्यार के सोजाऊं तो मुझे जगा देना .
तुम आते में भूल स्वयं को बांहों मैं सोती हूँ ।
चिंता जग की छोड़ तुम्हारे सपनों मैं खोती हूँ ।
सांसों की मदिरा पीती , पल पल जीती हूँ।
इस तंद्रा मैं खो जाऊं तो मुझे जगा देना ।
आज रात को यहाँ नहीं , घर जल्दी में जाउंगी ।
अगर बुलाओगे मन से तो फिर से आजाउन्गी ।
मेरा तन अब वापिस करदो ,मन चाहे रख लो ।
बेमन से ही सही मगर तुम मुझे जगा देना ।
जब तुम जाओ, मुझे जगा देना आ आ ।
विपिन चतुर्वेदी
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