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Tuesday, July 26, 2011

आज के मकान मालिक


हास्य-व्यंग्य-
मकान मालिक तो भगवान होता है
पंडित सुरेश नीरव
एक दौर वह भी था जब स्वर्ग में रहनेवाले देवता फालतू समय में फटाफट भारत में अवतार ले लिया करते थे। उनके लिए स्वर्ग से भारत आना एक फन-लविंग पिकनिक हुआ करती थी। क्योंकि उस वक्त आज की तरह मकान और खासकर किराये के मकान की समस्या नहीं हुआ करती थी। भगवान खुद मकान मालिक हुआ करते थे। बल्कि मकान मालिक होने के कारण ही वे भगवान हुआ करते थे। इसलिए मकान मालिक आज भी भगवान ही होता है। मकान मालिक के सारे अच्छे गुण भगवान में हुआ करते थे। या यूं कहें कि द्यूत क्रीड़ा,रास रचाना-जैसे जो दिव्य गुण भगवान में होते थे वे सारे-के-सारे गुण आज के मकान मालिक में होते हैं। जो छोटे स्तर के मकान मालिक थे, वे ऋषि कहलाते थे और उनके विशाल फार्महाउस नाना प्रकार की सुंदर-सुंदर वन कन्याओं और गउओं से लैस हुआ करते थे। जिन्हें वे विनम्रतावश आश्रम कहा करते थे। जहां दिन-रात बैठकर वे इसलिए तपस्या किया करते थे कि जब-जब धर्म की हानि हो तब-तब कोई प्रवासी यक्षणी या अप्सरा आए और उनकी तपस्या भंग करके उन्हें अलौकिक सुख प्रदान करे। वेद-पुराण और अरण्यों में कहीं भगवान को किरायेदार नहीं बताया गया है। सब उस समय के श्रेष्ठ बिल्डर और प्रॉपर्टी डीलर थे। जिसका जितना बड़ा मकान वो उतना बड़ा भगवान। आज भी जिसका जितना बड़ा मकान वो उतना बड़ा भगवान। आज भी जिसका जितना बड़ा मंदिर वो उतना बड़ा पद्मनाभ भगवान। पेड़ के नीचे खुले में भगवान न कभी रहे हैं और न कभी रहेंगे इस गूढ़ रहस्य को आदमी-तो-आदमी कुत्ते तक जानते हैं। इसलिए वे भी वहां पूरी भौंक के साथ अपना फेमिलीरिसॉर्ट बना लेते हैं। अरे वो भगवान ही क्या जिसका एक अदद मकान न हो। मकान तो भगवान की भगवाननैस नापने का बैरोमीटर है। जंगल में भटकते हुए भी भगवान को एक अदद पंचवटी तो होना-ही-होना।  रावण की लंका सोने की थी। बड़ा रसूकवाला मकान मालिक था। अपने इलाके का सुपर भगवान था। हर मकान मालिक की नज़र में किरायेदार हनुमान होता है। रावण की नजर में भी था। हर किरायेदार की नज़र में मकान मालिक भी रावण ही होता है। हर मकान मालिक को लगता है कि किराएदार उसकी अशोकवाटिका उजाड़ने ही आया है। वह हनुमानरूपी किराएदार की पूंछ में ऊलजुलूल शर्तों का लत्ता लपेटकर दिलजलाऊ किराए का पेट्रोल छिड़क देता है। यकीनन हनुमानजी भी पीढ़ित किरायेदार ही होंगे। वरना कौन  शरीफ आदमी किसी का घर जलाने उड़कर जाएगा। वो तो मकान मालिक की शर्ते सुनकर उन के होश इतनी तेज़ी से उड़े कि होश के साथ पूरे हनुमानजी ही उड़ गए। गुस्से में उन्होंने रावण की अशोकवाटिका जला दी। माननीय श्री रामचंद्र रघुवंशीजी अयोध्यावाले भी बड़े मकान मालिक थे इसलिए उन्होंने रावण का घर नहीं जलाया। वो प्रॉपर्टी का महत्व जानते थे। उन्होंने कब्जा करके वहां विभीषण नामक अपना गुर्गा बैठा दिया। मकान की कीमत मकान मालिक नहीं समझेगा तो क्या टिटपुंजिया किराएदार समझेगा। सब मकान की ही महिमा है। जिन बदनसीबों को मकान नहीं मिले वे मजबूरी में हिमालय की कंदराओं में रहने लगे। मकान मालिकों ने उनका मज़ाक उड़ाते हुए उन्हें फकीर कहना शुरू कर दिया। अब आप ही बताइए कि जिसका अपना मकान नहीं होगा वो बेचारा फकीर नहीं तो क्या राज़ा कहलाएगा। राजा राजा ही होता है भले ही वो तिहाड़ में रहे। एक इज्जतदार मकान मालिक दूसरे शरीफ मकान मालिक का वीआईपी मेहमान है। जिन शरणार्थी किराएदारों को हिमालय में भी झुग्गी डालने का मौका नहीं मिला वे शरीफ लोग नीम,पीपल,बरगद और इमली के पेड़ पर सपरिवार रहने लगे। मकान मालिकों ने उन्हें भूत-प्रेत-पिशाच कहकर उनकी खिल्ली उड़ानी शुरू कर दी। कहते हैं कि एक किरायेदार को दुनिया के मकान मालिकों ने इतना सताया कि गुस्से में नाव में बैठकर वो अपना गांव छोड़कर चल पड़ा और फिर गुस्से में ही उसने अमेरिका खोज डाला। लानत भेजता हूं मैं अपने आप पर कि कोलंबस ने तो अमेरिका खोज डाला और मैं समझदार एक अदद झुग्गी भी अपने लिए नहीं खोज पाया। इस मामले में अपुन भी बदनसीबी के बहादुरशाह जफर हैं जिसे दो गज जमीन भी नहीं मिली कूच-ए-यार में। चलो इस बहाने अपुन भी बादशाह तो हो गए। साथ में समझदार भी क्योंकि किसी ने कहा है कि मूर्ख घर बनाते हैं और होशियार उसमें रहते हैं। जब से मैंने किराये का मकान ढूंढ़ना शुरू किया है मैं अपने आप को अव्वल दर्जे का समझदार मानने लगा हूं।
आई-204,गोविंदपुरम,ग़ज़ियाबाद-201001
मोबाइल-9810243966
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