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Wednesday, August 31, 2011

धीरे-धीरे..आप भी


पंडित सुरेश नीरव
श्री भगवान सिंह हंस
आज आपने मेरे व्यंग्य पर जो टिप्पणी की है उसे पढ़कर मज़ा आ गया। आप भी धीरे-धीरे व्यंग्यकार होते जा रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि जयलोकमंगल के साथी शीघ्र ही भगवानसिंह हंसजी को एक कुशल व्यंग्यकार के रूप में देखेंगे। मेरी शुभकामनाएं..
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