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Friday, August 5, 2011

मकबूलजी-हंसजी स्वागतम


तकनीकी गड़बड़ के कारण हमारे दो साथी सर्वश्री मृगेन्द्र मकबूल और श्री भगवान सिंह हंस चाहकर भी ब्लॉग पर लिख नहीं पा रहे थे। आज दोनों को एक साथ ब्लॉग पर देखा तो मन प्रसन्न हो गया। वो ऐसे ही लिखते और दिखते रहें। मेरी शुभकामनाएं।
जय लोक मंगल।
पंडित सुरेश नीरव
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