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Monday, September 12, 2011

जयलोकमंगल


घनश्याम वशिष्ठ भिंड में
हमारे ब्लॉग और फेसबुक के नियमित लेखक घनश्याम वशिष्ठ एक सप्ताह के लिए भिंड प्रवास पर हैं इसलिए वे हमारे बीच दिखाई नहीं दे पाएंगे।  बाबजूद इसके उन्होंने भिंड के सायबर कैफे से अपनी पोस्ट भेजी है। उनकी निष्ठा सराहनीय है। कुछ लोग ऐसे आत्म मुग्ध होते हैं जिनकी निष्ठा सिर्फ अपने तक ही सीमित होती है। उन्हें इस बात से भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा मगर पड़नेवालों को तो पड़ जाता है। बधाई वसिष्ठजी..
पंडित सुरेश नीरव
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प्रकाश प्रलय फुल फॉर्म में..
हमारे अभिन्न मित्र प्रकाश प्रलय इन दिनों फुल फॉर्म में हैं और रोज़ नई-नई शब्दिकाएं लिख रहे हैं। और ब्लॉग पर दिख रहे हैं। लगे रहो मुन्ना भाई..
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