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Tuesday, September 6, 2011

धन्यबाद ----
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आदरनीय नीरव जी ,
नमन
आप अपने शिष्यों का
कितना ख्याल रखते हैं ,
मेरी गुमफोटो आज मिल गई ,
आभारी ''''
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शब्दिका ...
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अमरसिंह को
तिहाड़ में
देखते ही
कलमाड़ी ,राजा .के
साथ ही
अफ्ज्ल्गुरु
मुस्करा दिए ..........
हम बनें ,तुम बनें
एक दूजे के लिए-----------------
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प्रकाश प्रलय कटनी ------------------------------
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