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Sunday, October 30, 2011

मोहनसिंह ने नेताज़ी को बताया कि भारतीय सेना में ७० प्रतिशत नेहरू जी के प्रशंसक हैं

---------ज़ापान, ज़र्मनी,इटली,स्याम,बर्मा ,फिलीपींस,नासिक,नानकिंग,और मोनचुकों की सरकारों ने इस अस्थायी सरकार को मान्यता दे दी।अस्थायी सरकार ने २३अक्तूबर १९४३ की रात में ब्रिटेन व अमेरिका के विरूद्ध युद्ध की घोषणा कर दी।
नेताज़ी ने दिसंबर १९४३ के प्रथम सप्ताह में ज़ापानियों द्वारा मुक्त कराये अंज़मान व निकोबार द्वीप समूहों की यात्रा की और इनका नाम शहीद और स्वराज द्वीप रखा।मेज़र जनरल ए०डी०लोगनाथन को इन द्वीपों का मुख्य आयुक्त नियुक्त किया गया परंतु जब वे इन द्वीपों का चार्ज़ लेने पहुंचे तो ज़ापानियों ने ने उन्हें चार्ज़ नहीं दिया।
ज़ापानियों ने मोहनसिंह को पुलाऊ उविन द्वीप के नौसेनिक अड्डे एक मकान में कैद कर रखा था।उन्हें कोई सुविधा नहीं दी गयी।तीन सिखों ने जान का खतरा उठाकर गुपत रूप से मोहनसिंह से भेंट कीऔर वापस आकर नेताज़ी के निजी चिकित्सक डा० डी०एस० राजू से  भेंट की।मोहनसिंह मलेरिया से पीडित थे और नरकंकाल से दीख रहे थे।
डा०राजू और मेज़र ओगावा मोहनसिंह से मिलने गये।डा०राजू प्रयासों से नेताज़ी की मोहनसिंह से मुलाकात हुई।
मोहनसिंह ने नेताज़ी को सारी कथा सुनाई और कहा ज़ापानी आज़ाद हिंद फौज़ को आधुनिक हथियार नही देंगे।
मोहनसिंह ने नेताज़ी को बताया कि भारतीय सेना में ७० प्रतिशत नेहरू जी के प्रशंसक हैं।नेताज़ी ने कहा --"ज़ापानियों के बारे में आपके विचार सही हैं।मैं रोज़ाना अनेक कठिनाइयोंमका सामना कर रहा हूं।मैं अपनी स्वतंत्र शक्ति भी विकसित कर रहा हूं।हम कुछ समय बाद ज़ापानियों पर निर्भर नहीं रहेंगे।नेताज़ी ने मोहनसिंह से कहा लार्ड वावेल जो विशाल सेना खडी कर रहा है वह आज़ाद हिंद फौज़ के भारत में घुसते ही हमारे साथ हो जायेगी।
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