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Tuesday, November 15, 2011

श्री नीरवजी को हार्दिक बधाई

 हास्य-व्यंग्य -लंगोटी का अर्थशास्त्र बहुत ही बेहतरीन एवंम पढ़ने योग्य तथा शिक्षाप्रद है. श्री नीरवजी के ही शब्दों में देखिए-
लंगोटीवाले हमेशा अमीर रहे हैं। क्योंकि सूट-बूटवालों की आधी कमाई और लंगोटीभर कपड़ा तो दर्जियों के पास स्विसबैंक में कालेधन की तरह डायरेक्ट चला जाता है। हमारे मुहल्ले का एक जेबकतरा नगर का अव्वल तांत्रिक बन गया। उसका दावा है कि वह एक भागते भूत की लंगोटी छीन लाया है। लंगोटी पूज्यनीय हो गई। और लंगोटी के कारण तांत्रिक पुज गया। यह कोई नई बात थोड़े ही है। लंगोटी इस देश में हमेशा ही पूज्यनीय रही है। लंगोटी अखाड़े में फहराने से पिद्दी पहलवान की भी धाक जम जाती है। सोचता हूं सही मौके पर एक अदद अपनी गोपनीय लंगोटी को मैं भी सार्वजनिक कर दूं। वीआईपी बनने की दमित इच्छा कब तक दबाए रखूं। लागा चुनरी में दाग। लोग दागदार चुनरी से भी पब्लिसिटी हथिया लेते हैं। मेरी तो जस-की-तस धर दीनी लंगोटियावाला हूं। सोचता हू कि मैं अमीर हो पाऊं या नहीं मगर सिक्योरिटीवालों की मेहनत को तो मैं दिलचस्प बना ही सकता हूं एक लंगोटी के जरिए।
ऐसे बेहतरीन आलेख के लिए श्री नीरवजी को हार्दिक बधाई देता हूँ और उन्हें बार-बार प्रणाम करता हूँ.
भगवान सिंह हंस




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