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Friday, December 2, 2011

सौ गंगा स्नान का पुण्य

श्री भगवानसिंह हंस ने भरत चरित महाकाव्य जो रचा है, यकीनन उसे निष्ठापूर्वक पढ़नेवाले को सौ-सौ गंगा स्नान का पुण्य मिलता है। एक बार कोई इस काव्य-गंगा में डुबकी लगाकर देखे तो।आज के दौर की यह भावगीता है।
पंडित सुरेश नीरव
श्री भरत की चरित कथा, हंस ने दी सुनाय.
जो उसे सुने एक बार,  शत शत गंग नहाय.
इस प्रकार श्री भरत की चरित्र कथा महाकवि हंस ने सुनायी. जो मनुष्य इस कथा को एक बार पढ़ेगा या सुनेगा तो वह सौ-सौ गंगा नहायेगा
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