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Saturday, December 10, 2011

भरत चरित्र महाकाव्य











भरत चरित्र महाकाव्य से कुछ प्रसंग आपके दर्शनार्थ--

पीड़ित इल गया उमा पासा | देख उमा ने यों फिर भाषा ||
आधा भाग है महादेवा |   आधा     भाग     देख    मम सेवा  ||

फिर वह पीड़ित राजा उमा के पास गया | उसको देखकर उमा ने कहा, "हे राजा! आधा भाग महादेव का है  और  आधा भाग मेरी सेवा का है | ''

सो आधा  वर  कर स्वीकारा | समय  का और करो उचारा ||
एक एक मास इल ने उचारा | सो उमा ने किया स्वीकारा || 

इसलिए हे राजन! आधा वर स्वीकार करो | उमा ने कहा कि समय के लिए और बताओ | राजा इल ने एक-एक मास मांगा यानी एक मास पुरुष और एक मास स्त्री | वह भी उमा ने स्वीकार कर लिया |

इल राजा का एक मास स्त्री, एक मास पुरुषरूप |
त्रिभुवन   में सुन्दर नारि ,  मोहित   हों सब   भूप | | 

इसलिए वह इल राजा एक मास पुरुष और एक मास स्त्री बनकर रहता था | जब वह स्त्रीरूप में रहता था तो उसके समान त्रिभुवन में कोई स्त्री नहीं होती थी | उस पर सब राजा मोहित होते थे |

एक दिव्यसरोवर वन प्रान्ता | जल में वपु तेजस्वी नितान्ता ||
सोम पुत्र बुध तप  संलग्ना |  इला   बिलोक   हुई    बहु    मग्ना ||

उस वन प्रदेश में एक दिव्य सरोवर था | उसके जल में भीतर एक तेजस्वी शरीर तप कर रहा था | वह सोमदेव का पुत्र बुध तप में संलग्न था | उसको देखकर इला बहुत प्रसन्न हुई |

प्रस्तुति--

योगेश


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