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Tuesday, July 3, 2012

संस्करवान दिव्यात्माओं


गुरुर्ब्रह्मा-गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वरः
आज गुरुपूर्णिमा है। गुरुपूर्णिमा और शिक्षक दिवस में बुनियादी फर्क है। गुरु वह भी हो सकता है जिसने कभी मास्टरी न की हो और ऐसा भी हो सकता है कि जो रिटायरमेंट तक मास्टरी करता रहे मगर उसे कोई अपना गुरु न माने। मुझे खुशी है कि परिस्थितिवश मैंने सरकारी मास्टरी बहुत कम दिन तक ही की मगर बहुत लोग हैं जो मुझे हृदय से कहीं अपना गुरु मानते हैं। और वह भी वे लोग जो कभी मेरे छात्र नहीं रहे। ग्वालियर से रामवरण ओझा और पीयूष चतुर्वेदी, कटनी से प्रकाश प्रलय और दिल्ली से विष्णु शर्मा मैं आप सभी संस्करवान दिव्यात्माओं का आभारी हूं। जिन्होंने मुझे यह सम्मान दिया। मैं भी अपने मानस गुरु आचार्य निशांत केतु से सुबह-सुबह आशीर्वाद लेकर मंत्रस्नात हुआ हूं। भले ही जिनके औपचारिक छात्र होने का मुझे कभी सौभाग्य नहीं मिला।
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