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Monday, July 30, 2012

वाहिदजी तुसी ग्रेट हो।

डॉक्टर लक्ष्मणस्वरूप शर्मा वाहिद
इसे कहते है सज्जनता। मेरे 01 अगस्त के मुंबई आने का समाचार फेसबुक पर जैसे ही डॉक्टर लक्ष्मणस्वरूप शर्मा वाहिद ने फेसबुक पर पढ़ा उन्होंने फोन कर के  मुझे स्टेशन पर न केवल रिसीव करने का प्रस्ताव रखा बल्कि मलाड मेरी होटल तक छोड़ने और वापस दिल्ली की ट्रेन तक पहुंचाने का फैसला सुना दिया। उनके मुताबिक वे स्टेशन पर मेरी ट्रेन पहुंचने से पहले ही स्टेशन पर तैनात मिलेंगे। वाहिदजी तुसी ग्रेट हो।
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