Search This Blog

Thursday, July 5, 2012

मन रिषीकेश हुआ यादों के पुष्कर पल में---


मित्रों कल घर से निकला तो था कुछ लोगो की ऐसी -तैसी करने पर केवल दो आर०टी०आई० लगा कर सोचा दूरदर्शन के दर्शन कर लूं यदि पुराने मित्र अमरनाथ अमर अभी तक वहीं स्थापित हों तो नमस्ते करते चलें भाई लोग बताते हैं कि आजकल मिलने जुलने का ही खेल है सब, दैवयोग से जब पहुंचे तो लंच हो चुका था और पास बनवाने के लिये आधा घंटा इतज़ार करना पडा पर स्वभाव के विपरीत बडे निर्विकार भाव से हम प्रतीक्षारत रहे और जैसा कि बडे बुज़ुर्गो ने बताया है कि इंतज़ार का फल मीठा होता है अंततः उस अभेद्य दुर्ग में प्रवेश पा ही गये।
स्टूडियो न०१ में कुछ हलचल दिखी तो यों घुस गये जैसे हमारा ही इंतज़ार हो रहा हो।पर सामने नज़र पडी तो पाया 'कविता समय' की शूटिंग चल रही है और मंच पर जयशंकर शुक्ल,'कमल' जी नित्यानंद तुषार ,बालस्वरूप राही विराजमान थे और मध्य में थे संचालक पं० सुरेश नीरव।जब मैं पहुंचा तो जयशंकर शुक्ल काव्यपाठ कर रहे थे।अच्छा गीत पढा।जयशंकर शूक्ल को पहली बार सुना तो लगा बंदे में है दम।फिर नित्यानंद 'तुषार' ने एक के बाद कई गज़लें पढी।लगा वाकई चुराने लायक मटेरीयल है।यों तो तथाकथित अंतर्राष्ट्रीय कवि इनके शेरों पर डाका डालते हैं।तुषार की मौलिकता और कहन लाज़बाव है।बधाई तुषार जी आपको फिर सुनना चाहूंगा।इसके बाद नंबर था शायर 'कमल" जी का गज़ल में ताज़गी का तडका।५९ की उम्र में जोड घटा का हिसाब लगाती उनकी रचना अद्भुत थी।
वरिष्ठ गीतकार बाल स्वरूप राही ने जब पं० सुरेश नीरव को देश का सर्वश्रेष्ठ मंच संचालक कह कर आंमंत्रित किया तो लगा कुछ ज़्यादा हो गया पर नीरव जी के कंटेंट और कहन की मौलिकता ने सिद्ध कर दिया कि राही जी ने सच कहा था। नीरव जी ने दो गज़लें और एक गीत पढा।उनके गीत की पंक्ति कहीं गहरे उतर गयी---
मन रिषीकेश हुआ यादों के पुष्कर पल में---
और गज़लों में भी नये प्रयोग।बहुत-बहुत बधाई पं० सुरेश नीरव आप सचमुच पं० हैं।
अंत में बालस्वरूप राही ने गीत और गज़ल के कई रंग बिखेरे।इतनी अच्छी कवि गोष्ठी के प्रोड्यूसर का नाम पता किया तो पता चला 'कविता समय' के नीति नियंता ब्रजमोहन शर्मा जी अभी पैनल पे हैं और तभी शर्मा जी प्रकट हो गये अभिवादन का ज़बाव राधे-राधे से मिला।लगा दूरदर्शन पर अभी भी ‍साहित्य सही हाथों में है सुरक्षित है।अमर जी से अमरत्व का वरदान मांगने की अभिलाषा को स्थगित कर एक गीत गज़ल के सरोवर में स्नान कर विकार मुक्त हो आ गया हूं अच्छी कवितायें सुनना मन को रिषीकेश बना जाता है मेरी बात का समर्थन आप भी संभवतः ३१ जुलाई को 'कविता समय'का दर्शण कर करेंगे।
Post a Comment