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Thursday, October 11, 2012

चंद रचनाएं

जिंदगी फकत जजबात नही होती
यूं बेवजह कोई बात नही होती।
यादों के झरोंखों से देख लेता हूं,
वर्ना वर्षों तुमसे मुलाकात नही होती।
मैंने ख्‍चाबों को सिरहाने से सजा रखा है,
वगैर ख्‍वाब के मेरी कोई रात नही होती।
तुम भूलना चाहो तो भूल जाओ,
हर एक बात भूलने की बात नही होती।
कहीं धूप कहीं छांव जिंदगी के रंग है,
वगैर गम के खुशियों की बरसात नही होती।
-बंसी लाल
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लाख तूफ़ान हों, पार जाना भी है
चोट खाना भी है,मुस्कराना भी है
नाव को हर बला से बचाना भी है
पार लगना भी है, और लगाना भी है
क्या अनोखा है किरदार इंसान का
सूफ़ियाना भी है, वहशियाना भी है
ग़ैर की बज़्म में वो यूं ही तो नहीं
उसका मक़सद मेरा दिल दुखाना भी है
कोई सानी नहीं,उसके अंदाज़ का
दिलबराना भी है,कातिलाना भी है
. - दीक्षित दनकौरी
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