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Thursday, January 10, 2013

हिंदी अकादमी का सचिव की औकात ए आई सी सी के चपरासी जितनी भी नही रही।

२० साल से ज़्यादा कविता लिखते और १५ साल से ज़्यादा मंच पर कविता पढते हो गये।१८ वर्ष पूर्व देश की राजधानी में आ गया।शुरूआती दिनों में लालकिले में आयोजित होने वाले कविसम्मेलन को सुनने जाता था।बडी ललक थी कि कभी इस मंच से मैं भी कविता पढूं ।धीरे -धीरे छंद और छल-छंदों से परिचय हुआ और कवियों के कवित्व से ज़्यादा कपित्व से आमनासामना मुठभेड होना शुरू हुआ जो नाम आदरणीय और श्रद्धेय लगते थे वे ओछे और घटिया पाये और मोहभंग हुआ।डा० रामशरण गौड के रिटायरमेंट के बाद हिंदी अकादमी का सचिव की औकात ए आई सी सी के चपरासी जितनी भी नही रही।पर गत वर्ष जब अकादमी के सचिव ने कवि-सम्मेलन के दौरान नीरज जी का नाम --पूरा नाम गोपालदास सक्सेना नीरज बताया तो जहां उन्होने लोगों के सामान्य ज्ञान में अभूतपूर्व वृद्धि की वहीं दूसरी ओर शायद नीरज जी को भी ये अहसास करना चाहा कि वे कविता के गौरव बाद में उनके अपने समाज के गौरव पहले हैं।
इस वर्ष जो कवि फुटवाल मैदान में कविता पढ रहे हैं उनके बारे में कुछ ना कह कर मैं आप सब सुधि जनों के समक्ष ये प्रश्न रख रहा हूं कि अध्यक्षता कर रहे उदयप्रताप सिंह और सान्निध्य प्रदान कर रहे अशोक चक्रधर की कौन सी विँवशता है ,इस टीम में अपना नाम शामिल हो ने देने में।धन,यश सब कुछ तो ईश्वर ने दे दिया---तिकडम और राजनीति ठीक से चलती रही तो पद्मश्र वगैरा भी मिल जायेगी पर ऐसी घटिया टीम के साथ कविता पढने का कलंक ज इनके नाम के साथ जुडेगा वह केसे छुटेगा।आप कह सकते हैं कि मैं ये सब बाते कुंठित होने की वज़ह से कह रहा हूं तो आप ठीक कह रहे हैं ।हां,मैं कुंठित हूं पर इस वज़ह से नहीं कि मैं इस मंच से कविता नहीं पढ रहा पर मैं इसलिये कुंठित हूं कि जिस मंच से पिछले वर्ष तक भी गोपाल दास नीरज और बालकवि बैरागी जैसे नाम कविता पढ रहे थे उससे अब वे लोग कविता पढ रहे हैं
जिनका नाम लिखकर मैं उन्हेम महत्व नहीं देना चाहता।ये मंच सदैव से सिफारिशी मंच था पर जिनसे सिफारिश की जाती थी,जिनकी सिफारिश की जाती थी जो सिफारिश करते थे कहीं ना कही कुछ ना कुछ कविता के बारे में और कवियों के बारे में जानते थे ।अब तो अकादमी के सचिव की शायद निजी दुकान से ज़्यादा औकात नहीं रह गयी है इस कवि सम्मेलन की।
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