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Monday, December 14, 2009

लोकमंगल पढ़ना एक जरूरत बनता जा रहा है।

लोकमंगल पर आजकल खूब बहार आई हुई है। हर सदस्य अपनी पूरी हुनरमंदी के साथ मौजूद है। अरविंद पथिक लौट आए गुमशुदा की तलाश का पोस्टर सही काम कर गया। राजमणिजी ने बहुत अच्छी गजल दी है। मुनव्वर राना के अच्छे कलेक्शन उनके पास हैं। मकबूलजी का खजाना भी खूब भरा हुआ है। गजलों से लवरेज।
पुरुषोत्तमजी की कविता दिल को छू गई। अरविंद चतुर्वेदी ने ब्रज प्रदेश की मांग बड़ी ही रोचक ढंग से रखी है। नीरवजी की हजामत तो टॉप पर चल ही रही है। कौन नहीं चाहता कि उसकी हजामत न बने। आज लोकमंगल पढ़ना एक जरूरत बनता जा रहा है। मेरी बधाई। सभी ब्लॉगर बंधुओं को जिनकी मेहनत से यह इस मुकाम पर पहुंच सका है।
डॉ.मधु चतुर्वेदी

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