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Sunday, December 13, 2009

मथुरा के पेड़े की मिठास


हजामत
भगवान सिंह हंस
आज हमारे सेलून कीहॉट सीट पर ऱखे गए हैं श्री-श्री-108 भैया भगवान सिंह हंस,अलीगढ़वाले।  अलीगढ़ के फेमस है बहुत ताले। और चाकू। मगर आजकल चीन ने सभी चीजों पर अपना कब्जा कर लिया है। अब न अलीगढ़ के ताले प्रसिद्ध हैं और न ही चाकू। सब को छीन ले गए चीन के डाकू मगर एक चीज़ ऐसी है जिस पर अभी तक चीनवाले भी कब्जा नहीं जमा पाए हैं वह चीज है हमारे भैया हंस। जिनसे डरता है चीनी कंस। और धूर्तों का वंश। अलीगढ़ लगभग ब्रज क्षेत्र में ही आता है इसलिए इनकी चाल-ढाल में ब्रजवासी ठसक दिखाई देती है और सजन्नता भी। अलीगढ़ से मथुरा भी पास ही है। इसलिए भगवानजी में मथुरा के पेड़े की मिठास भी है। और काले गुलाबजामुन की लुनाई भी। लिखते हैं तो बस महाकाव्य और खंडकाव्य ही लिखते हैं। क्षणिका तो ये छिनकते भी नहीं हैं। अभी कुछ दिन से ब्लॉग से नदारद हैं। बड़ी परेशानी में हैं इसलिए न लिख रहे हैं न दिख रहे हैं। अब जब समय ही इनकी हजामत बना रहा तो मैं क्या इनकी हजामत बनाऊं. वैसे भी चांद पर बाल अल्पसंख्यक ही हैं। ढ़ूंढने पड़ेंगे मुझे। आज इनके चेहरे पर साबुन ही लगाकर छोड़ रहा हूं। हजमत फिर कभी तसल्ली से बनाऊंगा।
जय हजामत- जय हज्जाम
पं. सुरेश नीरव

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