Search This Blog

Friday, December 18, 2009

मौत एक बार जब आना है तो डरना क्या है?

काकोरी के क्रंतिकारी और वतनपरस्ती के बेहतरीन शायर जनाब अशफाकउल्लाह वारसी का आज शहीदी दिवस है। मैं अपने रूह की गहराइयों से उनके लिए गुंचए अकीदत भेंट रता हूं। और एक उनकी एक नज्म भी-
बुज़दिलों को ही सदा मौत से डरते देखा,
गो कि सौ बार उन्हे रोज़ ही मरते देखा
मौत से वीर को हमने नही डरते देखा
तख्तये मौत पै भी खेल ही करते देखा
मौत एक बार जब आना है तो डरना क्या है?
हम सदा खेल ही समझा किये,मरना क्या है?
वतन हमेशा रहे शाद काम और आज़ाद
हमारा क्या है,अगर हम रहे, रहे न रहे।

लोकमंगल के सभी सदस्यों के सलाम
प्रस्तुतिः ओ.चांडाल

1 comment:

Pushpendra Singh "Pushp" said...

बहुत अच्छी एवं सुन्दर रचना
बहुत -२ आभार