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Tuesday, December 15, 2009

राज को नाराज करने के पीछे क्या राज है



 हजामत
(मुलायम सिंह)
आज हजामत की हॉट सीट पर बैठे हैं सपा के मुखिया जनाबेआला मुलायम सिंह जी यादव। बहुत दिनों से वे कतार में थे ाज बुद्ध सदा शुद्ध की मुद्रा में वे यहां तशरीफ ले ही आए हैं। हमें बड़ी खुशी है कि एक गैर यागव के यहां वो पधारे. वो भी अपने एडवाइजर से पूछे हिना। मैं उनका पूरे ऩाईयोचित गौरव से सम्मान करता हूं। और इससे पहले कि चेहरे पर लगा साबुन सूखे उनसे कुछ बातें भी कर लेता हूं। भैयाजा पहले तो ये बताओ की कॉग्रेस के जय हो से आपको जय जयाप्रदा का नारा ज्यादा महत्वपूर्ण क्यों लगा। दुसरी बात कि जिन कल्याण सिंहजी ने भाजपा का कल्याण कर दिया उन्हें आप ने सपा के कल्याण के लिए क्यों भुला लिया। वो तो आजकल किसी की भी सुपारी उठा लेते हैं कल्याण करने के लिए। आपकी पार्टी का भी कल्याण कर ही दिया उन्होंने। आपने बड़ी मुशकिल से मुल्लायम सिंह की पदवी हासिल की थी इनके साथ आते ही वह टूट गई। आजम खां,सलीम शेरवानी तमाम लोग साथ छोड़ गए। अरे राजनीति करनी थी तो राज (राज बब्बर) का महत्व तो समझना था। ताज को नाराज करना कितना मंहगा पडा,ज़रा सोचिए। राज को नाराज करने के पीछे क्या राज है यह शायद आपको भी नहीं पता। शायद भैया अमर सिंह बताएं। खौर आब भाजपा से बहन माया से दोनों से ही आप नाराज है। आप इनसे नाराज हैं और आपके वोटर आपसे नाराज हैं। राज इतने बढ़ रहे हैं कि राजस्थान भी अधूरा है छोटा है आपके सामने। कल्योणजी से आप मिले तो लोहिया का हिया भी रो पड़ा होगा। आपने उन्हें रुलाया वोटरों ने फिरोजाबाद में आपको रुला दिया। खेर छोड़िए.इन बातों को। साबुन सूख रहा है। मैं आपको फिर तरोताज़ा कर रहा हूं हजामत बनाके। नए सिरे से डंड पेलिए आप पुराने अखाड़ेबाज है। आप की साइकिल पर हाथी न चढ़े कोई हाथ उसे रोक नहीं पाए मेरी यही दुआएं हैं। जय राम जी की..फिर मिलेंगे। जय हिंद..
पं. सुरेश नीरव

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