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Thursday, February 4, 2010

लगता है आज अपना मुकदर सिकंदर होगा

शायद अब कम करने वाला है कम्पुटर श्रीमान । पंडित सुरेश नीरव जी की इटली से वापिसी का समाचार पाकर अति प्रसनता हुई और सोचा वैह अपने वीश phountain के सामने बैठकर मांगी गए वर की चर्चा जरुर करेंगे । अपने द्वारा विश्व प्रसिद्धकोलासो की प्रान्गद (किसके के आधार पर आधुनिक स्तादियम बनाते है ) की चर्चा आनि चाहिए। मिलन के छोटे से दुर्ग चर्चा भी जरुरी है .वेनिस शहर के मध्य बने माकन । नावों से घुमाते लोग । कांच के बड़ी पुराणी फ़क्तोरिएस । पानी के मध्य बाद सुन्दर सा पार्क और साथ hi बड़ा सा मोटर नाव की सवारी उतरने का प्लात्फोर्म । रोम का स्टेशन पर मेरी यात्रा के मध्य वहां के स्थानीय कर्मचारियों जब यह बताया था की बच्हो को समभाल कर ले जाना क्योनिक एहन बच्हो को गायब करने वाले गुंडे घुमते रहते है । तो सुन कर बड़ा डर लगा था।
इतने दिन तक के बाद दूर रहने पड़ने के लिए बहुत ही उचह कोटि के विचार व रचनाये पड़ने को मिली । नए नए लोगों को आगमन हुआ ।
भाई ज्ञानेंद्र का आगमन वास्तव मैं स्वागत मांगता है इतनी व्यस्ताओं के बाबजूद भी वह इस ब्लॉग को नियमित रूप से पड़ते है।
भाई म्रिग्रेन्द्र का संकलन अदभुत है ॥
अब मुझे आशा है सब कुछ ठीक ही चलेगा । कुछ दिन पूर्व यात्रा वृतांत के बारे मैं सोच रहा था परन्तु एक के बाद एक यात्रा .सबा कुछ गड़बड़ा गया ।

तमाम शुभकामनाएँ के साथ

मुनीन्द्र नाथ

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